

देश में आज से समान शिक्षा अधिकार काकानून लागू हो गया है। कपिल सिब्बल के इस भागीरथी प्रयास को अभी जमीन पर उतरने में वक्त लगेगा, लेकिन बुलंदशहर के एक सैनिक ने अपने ही ढंग से ज्ञान की अलखजगाई है। केन्द्र सरकार में मुलाजिम ये सैनिक पिछले एक साल से खुले आसमान के नीचे देश-सेवा के लिए प्रतिभाऐं तराश रहा है।
बुलंदशहर में शाम ढले जब सूरज जमीन पर उतरता है, तो जौंठ गॉव के एक कोने में तालीम के पंख परवाज भरते है।खुले आसमान के नीचे पैबंद लगे टाट के तले इस गॉव में एक कक्षा चलती है औऱ इस गुरूकुल में तराशे जाते है देश की खातिर कुर्बान होने वाले सिपाही। बिहार के सुपर-थर्टी की तरह चलने वाली इस क्लास में जॉबाजी के जज्बे के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है, और वो भी एकदम फ्री। केन्द्र सरकार में मुलाजिम चिंतामणि कपासिया ने साल भर पहले इस क्लास का सपना देखा था। आज इस कक्षा में तैयारी करने वाले कई लड़के नौकरी पा चुके है और कई लाइन में है।
चिंतामणि कपासिया कहते है कि मौका मिलने पर जब वह गॉव आते थे, तो उन्होने गॉव के लड़कों को नशे और झगड़ों की गिरफ्त में देखकर बहुत दुख होता था। चिंतामणि कपासिया दिल्ली में 12 साल से सरकारी सेवा में है। लेकिन उनके बाद तीन हजार की आबादी वाले इस गॉव के किसी लड़के को सरकारी नौकरी नही मिली। नौजवानों को दिशा देने के लिए उन्होने कुछ करने की ठानी। उन्होने गॉव के लड़को को सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का खाका तैयार किया। उन्होने एक यूथ क्लब बनाया और ग्राम सभा की अनुमति से टाट की छॉव में क्लास शुरू कर दी। सेटरडे और संडे के वीकली ऑफ में चिंतामणि दिल्ली से गॉव आते है और दो दिन उनकी क्लास चलती है। दो महीने पहले जब उनकी क्लास के एक लड़के रिंकू का सीआरपीएफ में सलेक्शन हो गया तो आसपास के गॉवों में भी इस अनोखी कक्षा की चर्चाऐं शुरू हुई। आज चिंतामणि की क्लास में जौंठ के अलावा आसपास के गॉवों के 28 लड़के है। चिंतामणि के क्लास के छात्र सतीश बताते है कि उन्हें नही पता था कि परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्या करना होता है, लेकिन भाईजी ( चिंतामणि) ने उनकी तकदीर बदल दी।
चिंतामणि की इस कक्षा में यूपी और दिल्ली पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्सेज, रेलवे और बैंकिग की परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। फिजीकल टेस्ट में पार उतरने के लिए भी छात्रों को तैयार किया जाता है, जिसकी ट्रैनिंग चिंतामणि केभाई त्रिदीव कपासिया कराते है। चिंतामणि की इस कोशिश ने गॉवों के नौजवानों के जीवन की दशा बदल दी है। छोटी-सी नौकरी की कमाई में चितामणि ना तो इस कक्षा के लिए छत जुटा सके है और ना ही कुर्सियां। इन सुविधाओं की ख्बाहिश इस कक्षा के छात्रों को भी नही है। चिंतामणि के साथ इन नौजवानों को आपकी हौसलाअफजाई और दुआ की जरूरत है। ईश्वर करे हमारे देश के हरेक गॉव की चिन्ता करने के लिए ऐसे सैकड़ो चिंतामणि पैदा हो और देश में शिक्षा की तस्वीर बदल दें।